Saturday, July 25, 2026

प्रतिबिम्ब

 प्रतिबिंब

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

26-7-26.


प्रतिबिंब  दर्पण  में 

पानी में 

 तेल में 

पानी में चंद्र बिंब,

आँखों में प्रतिबिंब

  हर प्रतिबिंब में 

 चेहरे का वास्तविक प्रतिबिंब।

 सुंदर असुंदर

 सुख दुख का 

असली दृश्य।

 सुंदरता दिखाने का प्रतिबिम्ब।

 एक अभिनेता या अभिनेत्री 

अपनी अभिनय 

कला को यथार्थ  रूप देने दर्पण के सामने 

 अभिनय करके 

नव रस के अभिनय में 

  हजारों के हृदय में 

 प्रतिबिंबित  रहते हैं।

   कबीर भी भगवान के  प्रतिबिम्ब  को अपने नयनों में 

कैद करके परमानंद का अनुभव करते हैं।


 किया गया है:नैनन की करि कोठरी, पुतली पलँग बिछाय।पलकों की चिक डारि कै, पिय को लिया रिझाय॥

 प्रेम भक्ति का प्रतिबिम्ब।

 गूँज शब्दों का प्रतिबिम्ब।

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आपकी रचना का भाव अच्छा है। भाषा और प्रवाह को थोड़ा सँवारने से यह और प्रभावशाली बन सकती है।

पहला सुझाव: "तेल में, पानी में" की पुनरावृत्ति हटाई जा सकती है।

दूसरा सुझाव: "यथार्थ रूप देने" और "प्रतिबिंबित रहते हैं" जैसे वाक्यों को थोड़ा सरल बनाया जा सकता है।

आज की चुनौती : प्रतिबिंब

प्रतिबिंब

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

26-7-26

प्रतिबिंब दर्पण में,

पानी में,

तेल में,

चंद्रमा के जल-बिंब में,

और आँखों की पुतलियों में दिखाई देता है।

हर प्रतिबिंब

चेहरे का वास्तविक रूप

किसी न किसी रूप में

हमारे सामने प्रस्तुत करता है।

सुंदर हो या असुंदर,

सुख हो या दुःख,

प्रतिबिंब

सच्चाई का परिचय देता है।

एक अभिनेता या अभिनेत्री

दर्पण के सामने

अपने अभिनय का अभ्यास करते हैं,

तभी उनके भाव,

नवरस की अभिव्यक्ति बनकर

हजारों हृदयों में

प्रतिबिंबित हो जाते हैं।

संत कबीर ने भी

प्रेम-भक्ति के प्रतिबिंब को

अपने नयनों में बसाने का भाव व्यक्त किया है—

"नैनन की करि कोठरी, पुतली पलंग बिछाय।

पलकों की चिक डारि कै, पिय को लिया रिझाय॥"

यह प्रेम और भक्ति का

अद्भुत प्रतिबिंब है।

जिस प्रकार प्रतिध्वनि

शब्दों का प्रतिबिंब होती है,

उसी प्रकार

निर्मल हृदय

ईश्वर का सच्चा प्रतिबिंब होता है।







 

 

 




 







 


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