सपनों का संसार
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई।
13-6-26.
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सपनों का संसार
अच्छा लगता है।
साकार होने पर
जीवन सार्थक होता है।
दिवा सपना आलसियों के लिए,
दिन में सोना बुरा है।
तड़के गहरी नींद का सपना,
सच का प्रतीक होता है।
बैठे जागते कोरी कल्पनाएँ,
सपनों का संसार होता है।
मेरे सपनों के संसार में
ईमानदारी, सत्य,अहिंसा, संतोष
शांति का संसार।
सर्वत्र न्याय,
शिक्षा में न अमीरी ग़रीबी के भेदभाव।
चिकित्सा में भी।
भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोरी
अधिकारियों को
तटस्थ सज़ा।
मानव मन में
इन्सानियत रहें।
मत देने लेन-देन न हो।
रिश्वत रोकने अलग विभाग,
पर चुनाव से लेकर
श्मशान तक रिश्वत।
न्यायालय में
सिविल हो या क्रिमिनल
समान दंड प्रक्रिया हो।
हर मानव निस्वार्थ रहें।
दान धर्म का महत्व समझें।
सब को याद रहें,
संसार नश्वर है।
कर्म के अनुसार
जीवन सुखी या दुखी होता है।
ईश्वर का भय रहें ।
स्वच्छ भारत की कल्पना में,
हर नागरिक को साथ देना चाहिए।
पुलिस, सरकारी अधिकारी अपनी कार्रवाई में देरी न करें।
संक्षेप में देश स्वर्ग तुल्य बनने में
नागरिक दत्त चित्त हो जाएँ।
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एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नै
आज की चुनौती
सपनों का संसार
एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई
13-07-2026
सपनों का संसार
सदा अच्छा लगता है,
जब वह साकार हो जाए,
तभी जीवन सार्थक बनता है।
दिवास्वप्न आलस्य का प्रतीक है,
दिन में सोना उचित नहीं।
प्रातःकाल की गहरी नींद का सपना
कभी-कभी सत्य का संकेत माना जाता है।
जागते हुए की कोरी कल्पनाएँ भी
सपनों का ही संसार रचती हैं।
मेरे सपनों के संसार में
ईमानदारी, सत्य, अहिंसा, संतोष
और शांति का साम्राज्य हो।
सर्वत्र न्याय का शासन हो।
शिक्षा और चिकित्सा में
अमीरी-गरीबी का कोई भेदभाव न रहे।
भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी करने वाले
अधिकारियों को
निष्पक्ष और कठोर दंड मिले।
हर मानव के हृदय में
इंसानियत जीवित रहे।
मतदान में लेन-देन न हो।
रिश्वत रोकने के लिए
सशक्त व्यवस्था बने,
क्योंकि आज चुनाव से लेकर
श्मशान तक रिश्वत का बोलबाला है।
न्यायालयों में
चाहे सिविल मामला हो या आपराधिक,
न्याय की प्रक्रिया समान और निष्पक्ष हो।
हर व्यक्ति निस्वार्थ भाव से
समाज की सेवा करे।
दान और धर्म का महत्व समझे।
सदैव स्मरण रहे कि
यह संसार नश्वर है।
कर्मों के अनुसार ही
जीवन सुखी या दुखी बनता है।
ईश्वर का भय और
सदाचार का भाव बना रहे।
स्वच्छ भारत के स्वप्न को साकार करने में
हर नागरिक अपना योगदान दे।
पुलिस और सरकारी अधिकारी
अपने कर्तव्यों का पालन
बिना विलंब और निष्पक्षता से करें।
संक्षेप में—
मेरा सपना है कि
देश का प्रत्येक नागरिक
कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और जागरूक बने,
तभी हमारा भारत
वास्तव में स्वर्ग-तुल्य राष्ट्र बन सके।
— एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई :::
विषय और भाव अत्यंत प्रेरणादायक हैं। यदि चाहें, मैं इसे और अधिक काव्यात्मक (छंदबद्ध) या मंच-पाठ के अनुरूप भी रूपांतरित कर सकता हूँ।
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