कर्म और निर्णय
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।
10-4-26.
कर्म निर्णय
मानव करता है या ब्रह्म।
मेरे बुढ़ापे में बहुत सोचता हूं।
तमिलनाडु में सर्वत्र हिन्दी विरोध।
हिंदी कहते ही
पीटेंगे मारेंगे।
1965 से 1970 तक
हिंदी का विरोध।
कर्म निर्णय मेरा नहीं,
ईश्वरीय देन।
अनेक विभागों में
लिपिक का काम।
पर मेरे मन में लगा
मेरी माँ गोमती जो
पलनी क्षेत्र में
राष्ट्रीय एकता की
प्रेरणा और मज़बूरी
हिंदी प्रचार में
लगने की प्रेरणा।
यह हिंदी प्रचार कर्म
और निर्णय
मेरा अपना नहीं,
ईश्वरीय देन।
माँ देवी ईश्वरीय प्रतिनिधि।
जहाँ संभावना ही नहीं
उस तमिलनाडु में
लोक प्रसिद्ध लेस्ली स्कूल में हिंदी अध्यापक।
भगवान बालाजी की कृपा से स्नातकोत्तर
तुरंत हिंदु हाईस्कूल में
स्नातकोत्तर अध्यापक।
जहाँ विश्वप्रसिद्ध सिल्वर टंग श्रीनिवासाचार्य प्रधान अध्यापक रहे,
वहाँ पहली बार एक
हिंदी अध्यापक को
प्रधान अध्यापक की पदोन्नति।
तमिलनाडु के इतिहास में हिंदी अध्यापक का प्रधान अध्यापक पद
वह भी हिंदु हाई स्कूल में।
उनसे बढ़कर हिंदी साहित्य संस्थान लखनऊ के सौहार्द पुरस्कार।
यह कर्म और कर्तव्य निभाने की शक्ति मेरा अपना कर्मनिष्ठ,
मन की एकाग्रता का
निर्णय,
अनुकूल वातावरण,
ईश्वरीय निर्णय के सिवा
और कोई नहीं।
साथ में भगवान मनुष्य रूपेण के अनुसार,
मेरे मामा,मेरी माँ, सभा के सचिव एम.सुब्रह्मण्यम जी, ई.तंगप्पन जी, वी.एस.राधाकृष्णनजी, मीनाक्षी जी, गुरुवर रामचंद्र शा, सभा के व्यवस्थापक सत्याग्रह आचार्य, श्री ओ.आर.राजगोपालनजी, गोपाल चक्रवर्ती जी,
मेरे मामा नागराजन, शंकरनारायणन । डाक्टर राजलक्ष्मी कृष्णन की प्रेरणा से ही सौहार्द सम्मान के लिए आवेदन पत्र भेजा।
मेरे ब्लॉग तमिल हिंदी संपर्क, और रामक्री के दर्शक एक लाख पचास हजार से ज्यादा विश्व भर में।
V.poor blog 45 हज़ार दर्शक यह
कर्म और निर्णय ईश्वर की ही देन।
इन सबकी सहायता और हिंदी में ही कर्म करने का प्रोत्साहन और मेरी धर्म पत्नी की सेवा एम.ए,बी.एड, एम् एंड पढ़ने तक कहीं मनोरंजन की माँग नहीं की।
अतः मेरा कर्म निर्णय और कर्तव्य निष्ठा ईश्वरीय अनुग्रह है।
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