Thursday, January 21, 2016

இலக்கியம் எப்படி .?

सनातनी छंद समारोह .
सनातनी हिंदु धर्म
आदि समझने, समझाने
अवधि व्रज मैथिली अपभ्रम
डिंगल पिंगल ज्ञानियों की है जरूरत।
हम है आधुनिक  तीसरी विश्व भाषा हिंदी के चाहक
भारतेंदु काल की खडी बोली,
रामानंदसागर के रामायण के 
गुप्त जी के साकेत.प्रसाद के कमायनी
दिनकर के कुरुक्षेत्र को
आसानी से समझनेवाले।
यु्वकों को हिंदी की ओर खींचने
जीन्स के हिंदी चाहिए न कौपीनधारी हिंदी।
संस्कृत सी न दशा हिंदी की न हो तो
आधुनिक हिंदी चाहिए  न सनातनी हिंदी।
वैज्ञानिक हिंदी; टकनिकी हिंदी।

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