Tuesday, December 3, 2013

छोड़ो मत नारा लगाना --"सत्य-मेव जयते

सत्य    की  विजय झूठ का हार निश्चित है?
क्या इस जग में लोकतंत्र शासन में या राज्य-तंत्र में  ,
महाभारत में ,रामायण में साध्य रहा यह तत्व.
कर्तव्य कर, फल की चिंता ईश्वर पर छोड़.
खेत में कठोर मेहनत कर,फल अपने मालिक पर छोड़.
खाना पका;दूसरों को खिला;खुद भूख सह;
भगवान की याद में रह;अलौकिक आनंद भोग;
लौकिकता केवल लौकिक भाग्यवानों के लिए;
सच्चे भक्त तो कुछ नहीं चाहता;आश्रम न बनवाता;
दीक्षा देने पैसे न लेता;
कर ताल भिक्षा;तरु तल्वासा रह जाता;
सोना-चांदी के लालच में नहीं पड़ता;
केवल कोपीन धारण कर चुप-चाप नाम-स्मरण जपता;
सदुपदेश  ;दीनावस्था में जीता;
उनकी वाणी का संग्रह करके  उनके शिष्य बनते मालामाल;
चित्रपट में उनकी कहानी बनता निर्माता मालामाल;
उन श्रेष्ठों के शोध ग्रब्थ लिखकर पाते उपाधियाँ;
उनके स्मारक बनाके.बनवाके चंदा इकठ्ठा करके 
बनता नामी सेवक.
पर कोई भी उन उपदेशों का पालन नहीं करता;
फिर भी सत्यमेव जयते का नारा गूंजता रहता समाज में;
चुनाव लड़ो;जीतो ;इस नारे को लेकर;
करो भ्रष्टाचार;जोड़ो काला-धन;
छोड़ो  मत  यह नारा "सत्य-मेव "जयते.
छोड़ो  मत महात्माओं के नाम  जय का नारा लगाना;
छोड़ो मत उन की शिलाएं ,बनाना,माला पहनाना;
जोड़ो  काला-धन ,पर मत छोड़ो नारा लगाना "सत्य मेव जयते;
कम से कम तेरे कुछ अनुयायी सत्य का अनुकरण करेंगे;
संसार में कुछ सद काम चलेंगे;
अच्छे एक होने पर होगी वर्षा;
धरती होगी हरा-भरा;
छोड़ो मत नारा लगाना --"सत्य-मेव जयते".
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