Monday, May 7, 2012

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आजकल  की बडी चर्चा तमिळ विजय टि ।वी। में  ""तू तू --मैं-मैं- कार्य क्रम में गोपीनाथ जी  नारीयो की पोशाक 

और नर की मनःस्थिती पर .उसमें पुरुष अपनी युवावस्था 
 में नारीयों की हंसी-उडाना  ही पुरुषत्व बोल रहे थे।
उनके विचार में आत्मसंयम,ईन्द्रिय नियंत्रण,मनुष्यत्व 
नारी के प्रति  श्रद्धा या मर्यादा का भाव नहीं .

युवक का हक युवतीयोम   हक एक दुसरे को  हंसी उडाना।

याह तो उम्र की उत्तेजना।

तब तो eve teasing kee शिकायातेम बेकार ही है .

एक लडकी से  तो  पू छा  तो  उस ने  कहां कि हम में अधिक ल्द्को का छेड -छा ड  चाहती है .

याह तो जमाना अजीबो;गरीब .




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